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बिहार में पंचायतों के तेजी से विकास के लिए जल्द जारी होगा 2255 करोड़ रुपए, जानें पंचायतों को मिलेगी कितनी राशि

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बिहार के ग्राम पंचायतों में चल रही सरकारी योजनाओं और विकास के कामों को रफ्तार देने हेतु शीघ्र ही 2255 करोड़ 91 लाख रुपए जारी किए जाएंगे। छठे राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के संदर्भ में वित्तीय साल 2021-22 के तहत पहले एवं दूसरे इंस्टालमेंट के तौर पर इस राशि को जारी करने की मंजूरी दे दी गई है। राज्य सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि स्वीकृत राशि का 70 फीसद हिस्सा ग्राम पंचायतों और जिला परिषद और पंचायत समितियों को 15-15 फीसद दी जाएगी।

पदाधिकारियों और नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को साफ तौर पर मंत्री ने निर्देश दिया है कि विकास कार्यों में राशि को निर्धारित समय पर खर्च करना सुनिश्चित करें। मंत्री ने कहा कि गांवों में कार्य, कार्यालय खर्च, कर्मियों-प्रतिनिधियों के क्षमता वर्द्धन, कर्मियों के वेतन अन्य कोष में यह राशि जारी की जा रही है।

गौरतलब हो कि मौजूदा समय में विशेष रुप से नल-जल योजना के बेहतर क्रियान्वयन, छूटे जगहों में नली-गली का पक्कीकरण कार्य व गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने पर राशि खर्च होने है। जारी राशि में ग्राम पंचायत एवं ग्राम कचहरी के लिए 1522 करोड़ से अधिक तथा पंचायत समिति और जिला परिषद में 366-366 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायत के लिए कार्यालय खर्च की अधिकतम 60 हजार, पंचायत समिति के लिए 1 लाख 20 हजार व जिला परिषद कार्यालय के लिए दो लाख 40 हजार रुपए होगी। विदित हो कि सूबे में ग्राम पंचायत के 8067, ग्राम कचहरी के 8067, पंचायत समिति के 534 तथा जिला परिषद के 38 कार्यालय हैं।

जनवरी, 2022 में 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में त्रि-स्तरीय ग्राम पंचायतों के बीच 741 करोड़ 80 लाख रुपए वितरित किए गए थे। बता दें कि 70:15:15 फॉर्मूले पर राशि का वितरण ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद के बीच किया गया था। यह 15वें वित्त आयोग की 2021-22 की दूसरी इंस्टॉलमेंट थी।

बता दें कि स्वीकृत राशि को जिन कार्यों के लिए खर्च किया जाता है उनमें नागरिक सेवाओं के विकास। पेयजल आपूर्ति। ठोस एवं तरल अवशिष्ट का संग्रहण व उसका निपटारा। श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों का निर्माण। खेल के मैदानों का प्रबंधन आदि।सार्वजनिक शौचालय निर्माण। साथ ही कर्मियों का वेतन, मानदेय, कार्यालय खर्च, फर्नीचर और स्टेशनरी की खरीद इत्यादि।