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बिहार के एक युवा की कहानी, कभी पिता के सामने लोगों ने उड़ाया था मजाक पर आज लोग करते हैं तारीफ

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वो एक कहावत है ना कि प्यार में धोखा खाया बिहारी युवा यूपीएससी क्लियर कर लेता है। कुछ इसी तरह की कहानी है बिहार के इस युवा की। कभी पिता के सामने ही खुद को अपमानित होने वाले इस युवा ने अपने जिद्द और जुनून से साबित कर दिया है कि अगर किसी चीज़ को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे पूरी करने में जुट जाती है। अपनी दमदार लेखनी से लाखों पाठकों के दिलों पर राज कर रहे इस युवा की कहानी बेहद दिलचस्प रही है।

कुमार ऋत्विज बिहार के भागलपुर शहर के हैं। पिछले साल यानी 2021 में 17 फरवरी को उन्होंने अपने फेसबुक पेज ‘ऋत्विज भाईजान’ का नाम बदलकर लेखनबाजी कर दिया। उस समय महज 180 लोग ही इनसे जुड़े थे। यूं कहें तो नाममात्र के फॉलोअर्स थे।

31 मार्च का दिन उनके जीवन में बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। पूर्णिया की बड़ी शख्सियत ने पिता के सामने ही ऋत्विज के हौसले पस्त कर दिए। उन्होंने उनकी करियर की चिंता करते हुए लताड़ लगाई और कहा कि 4,000 फॉलोअर्स वाले पेज से क्या ही कर लोगे तुम? तुम्हारे जैसे टुच्चे लेखकों को कोई पूछता तक नहीं। एक समय के ‌लिए ऋत्विज को सोचने पर मजबूर होना पड़ा।

अपने आप में हताश और निराश ऋत्विज का बड़े दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से पूर्णिया छूट गया और आगमन हुआ भागलपुर शहर में। यहीं शहर उनके लिए नया ठिकाना बन गया। अजनबी शहर और अजनबी लोग लेकिन ऋत्विज अभी भी आत्मविश्वास से लबरेज थे। बिना परवाह किए बगैर ही जमीन पर लोगों से घूम-घूमकर मिलते रहे और उन्हें अपने पेज के बारे में बताते रहें। यह उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया था।

ऋत्विज ने दोगुने जोश और उत्साह के साथ अपने पेज ‘लेखनबाजी’ से खेल, राजनीति, क्षणिका, कहानी, कविता, मनोरंजन के बारे में लिखना शुरू कर दिया। इनकी दमदार लेखनी का हर कोई मुरीद होते गया। ऋत्विज क्रिकेट खेलने और खिलाने दोनों के शौकीन हैं। वे ज्यादातर क्रिकेट पर लिखते हैं। इतने जबरदस्त लिखते हैं कि पढ़ने के बाद हर कोई इनकी तारीफ में कसीदे पढ़े। धीरे-धीरे पेज से जुड़ने वालों की संख्या हजारों में हो गई और हजार से लाख होने में भी ज्यादा समय नहीं लगा।

ऋत्विज के कलम का ही जादू है कि उनसे जुड़ने वाले की संख्या लाखों में हो गई है। अब उनकी लिखी गई पोस्ट को लाखों लोग पढ़ते हैं और अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। हाल ही में विराट की वनडे कप्तानी छीने जाने के बाद उन्होंने पोस्ट लिखी थी। महज 2 दिनों में 25 लाख से अधिक लोगों ने इसे पढ़ लिया था। एक नहीं ऐसे कई पोस्ट हैं जिसे 50 लाख लोगों ने पढ़ा है। आज की तारीख में उनके लेखनबाजी के 1 लाख 10 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

ऋत्विज की दमदार लेखनी और बुलंद हौसले का ही परिणाम है कि उनकी पेज ‘लेखनाबाजी’ बिहार की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली पेज में शुमार हो गई है। इन पर साहिर लुधियानवी की पंक्तियां सटीक बैठती है। हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें, वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं। बिहार के इस युवा की लेखन प्रतिभा को बिहार ख़बर का सलाम।

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