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बिहार में बालू खनन के नियमों में हुए बदलाव, घाट का टेंडर पाने के बनी ये प्रक्रिया

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हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के आठ जिलों में बालू घाटों से खनन के लिए नए ठीकदारों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो गई है। चयन किए गए ठीकेदारों को खनिज नियमावली-2019 के प्रविधानों के अनुसार मैक्सिमम दो सौ हेक्टेयर या ज्यादा से ज्यादा दो बालू घाटों का ठीका ही मिल सकेगा। नए ठेकेदारों खनिज विकास निगम में जीपीएस लगी नावों की शर्त लागू की है। इसका मतलब जिन ठेकेदारों को बालू घाट का पट्टा दिया जाएगा, उन्हें नदियों से बालू खनन के पूर्व अपनी नावों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशिनिंग सिटस्म) लगाना होगा।

बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सूबे के औरंगाबाद, रोहतास, भोजपुर, पटना, लखीसराय, जमुई, गया और सारण जिले में बालू खनन की अनुमति के बाद टेंडर जारी कर दिया गया है। पहले बनाए गए नियमों में अब कई तरह के बदलाव किए गए हैं। पहले सभी नदियों की एक इकाई मान या फिर दो जिलों को जोड़कर एक इकाई मानते हुए इनकी बंदोबस्त होती थी। अब नई व्यवस्था में प्रत्येक जिले में नदियों को अलग-अलग बांट कर बंदोबस्त का नियम बनाया गया है। बालू खनन शुरू होने से ज्यादा से ज्यादा ठेकेदारों को रोजगार मिल सके इसके लिए यह व्यवस्था की गई है।

अवैध खनन पर लगाम लगाने के चलते नया में ठेकेदारों को नावों का सारा विवरण विभाग को पहले मुहैया कराना होगा। सभी नावों को जीपीएस से लैस करने की बात कही गई है। निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर खनन करने पर नाव की मॉनिटरिंग की जाएगी। मॉनिटरिंग के लिए खनिज विकास निगम ने सेंटर भी बनाए हैं। राज्य में बालू खनन शुरू होने से बालू की होने वाली समस्या खत्म होगी वहीं प्रदेश वासियों को सस्ते दर पर बाल मिलने की पूरी उम्मीद है।

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